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Thursday, 1 January 2015

न हम रहे दिल....

न हम रहे दिल लगाने के क़ाबिल,

न दिल रहा ग़म उठाने के क़ाबिल,

लगा उसकी यादों के जो ज़ख्म दिल पर,

न छोड़ा उस ने मुस्कुराने के क़ाबिल...

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