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Thursday, 13 February 2014

लफ़्ज दर लफ़्ज़ चुकाया...


लफ़्ज दर लफ़्ज़ चुकाया है किराया इश्क का ,,,
दिलों के दरमियां यूँ मुफ्त में नहीं रहती !
साल दर साल गर अपनी उम्र न देते इसको,,,
तो ज़माने में मोहब्बत जवां नहीं रहती !!


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कहीं अंधेरा तो.....


कहीं अंधेरा तो कहीं शाम होगी,,
मेरी हर खुशी तेरे नाम होगी,,
कभी माँग कर तो देख हमसे ऐ दोस्त
होंठों पर हँसी और हथेली पर जान होगी..

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दिन भर कि थकान.....


दिन भर कि थकान,पैसों की तंगी,

जमाने भर की बेकार बातें,मुश्किल हालात् जिन्दगी के,

एक तेरे मुस्कराते चेहरे के सामने,सब झूठ से लगते हैं .

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hawa ke jhoko ka kya karna

Hawa k jhonko ka hissab kia rakhna..

Jo beet Gaye pal unhe yaad kia rakhna..

Bas yehi soch k muskura dety hain hum,,

K Apni udaasi se dusron ko udaas kia rakhna..!